Monday, 27 April 2015

पर्यावरण संरक्षण में हमारी भूमिका

पर्यावरण संरक्षण एक ऐसा मुद्दा है जिसे अकेले कोई हल नहीं कर सकता। न तो मात्र सरकारी स्तर पर बढ़ते पर्यावरण असंतुलन को नियन्त्रित किया जा सकता है तथा न ही कोई संगठन कर सकता है। इसके संरक्षण एवं संवर्द्धन में प्रत्येक व्यक्ति अपना योगदान दे तो यह कार्य आसान हो सकता है। इसके लिए हम सभी कुछ न कुछ योगदान अवश्य कर सकते हैं, चाहे हम विघार्थी हैं, शिक्षक हैं, जनप्रतिनिधि हैं, किसान हैं, युवा हैं, गृहणी हैं या व्यापारी। हम सबकी पर्यावरण संरक्षण में भूमिका हो सकती है, यदि हम दैनिक जीवन में कुछ छोटी—छोटी बातों का ध्यान रखकर कार्य करें।

कुछ करने योग्य बातें -

1. पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों का न्यूनतम विरोध अवश्य करें।
2. कागज़ का दोनों तरफ से प्रयोग करके कागज़ की खपत घटायें तथा लिफाफों को भी पुनः प्रयोग में लायें।
3. पुरानी पुस्तकें पुस्तकालयों या जरूरतमंद लोगों को भेंट कर दें।
4. यात्रा के लिए यथासंभव सार्वजनिक वाहनों का ही प्रयोग करें। कम दूरी की यात्रा के लिए साईकिल का प्रयोग करें।
5. बाज़ार जाते समय कपड़े या जूट का थ्ौला साथ ले जायें, सामान उसी में लायें।
6. नल बेकार चल रहा हो तो तुरन्त बंद कर दें।
7. हर प्रकार से जल की बचत करें, क्योंकि जल ही जीवन है।
8. फलों व सब्जियों के छिलकों को केंचुओं की मदद से खाद बनाने में प्रयोग करें।
9. खुशी के अवसरों व अपने प्रियजनों की स्मृति में पौधे लगायें।
10. पर्यावरण संरक्षण में मद्दगार जीवों यथा गिद्ध, सांप, छिपकली, मेंढ़क, केंचुआ तथा बाघ आदि की रक्षा करें।
11. पेयजल स्त्रोतों के आसपास सफाई रखें।
12. वर्षा जल के संग्रह का स्वयं प्रयास करें व सरकारी योजनाओं में सहयोग करें।
13. परम्परागत जल स्त्रोतों—जोहड़, तालाब, नदियों व बावड़ियों आदि का संरक्षण करेंं।
14. अपने खेतों की मेंढ ऊंची बनायें ताकि वर्षा का पानी बहकर न जा सके।
15. पानी का बार—बार प्रयोग करें जैसे—सब्जी धोए हुए पानी को पौधों में डाल दें। कपड़े धोए हुए पानी से पोंछा लगा लें।
16. व्यर्थ बहते व गन्दे पानी को सोख्ता गड्ढे (सोक पिट्स) बनाकर उसमें डालें। इससे कीचड़ तो समाप्त होगा ही भूमिगत जलस्तर बढ़ाने में भी मद्द मिलेगी।
17. गोबर गैस प्लांट लगाकर बायो गैस से भोजन बनायें तथा ईंधन के रूप में जलने वाली लकड़ी व गोबर की बचत करें। सरकार अनुदान देकर गोबर गैस प्लांट लगवाती है।
18. सौर उपकरणों का प्रयोग करके ऊर्जा संसाधन बचायें। सौर उपकरण भी सरकार अनुदान पर उपलब्ध करवाती है।
19. नियमित रूप से यज्ञ करें ताकि वातावरण शुद्ध रहे।
20. रतनजोत (जट्रोफा) के अधिक से अधिक पौधे लगाकर बायो डीजल बनाने में सहयोग करें। पौधे लगाने के लिए सरकार सहयोग करती है तथा पैदावार भी खरीदती है।
21. खाना पकाने के लिए उन्नत व धुंआ रहित चूल्हों का प्रयोग करें।
22. जंगली जीव—जन्तुओं की सुरक्षा करें, अवैध शिकार रोकने में सहयोग करें।
23. जैव खाद व जैव कीटनाशकों का प्रयोग करें, ये पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।
24. कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाने में अपना सहयोग दें, इससे सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है।
25. आबादी के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए परिवार सीमित रखें।

न करने योग्य बातें -

1. धूम्रपान कभी न करें, इससे कैंसर व टी.बी. जैसे रोग हो सकते हैं साथ ही वातावरण भी प्रदूषित होता है। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना दण्डनीय अपराध है, क्योंकि सरकार ने धूम्रपान पर रोक लगा रखी है।
2. गुटखा व तम्बाकू न खायें, ये मुंह के कैंसर को जन्म देते हैं साथ ही इनकी पाउच व थैलियों से पर्यावरण प्रदूषित होता है।
3. पॉलिथीन थैलियों का प्रयोग न करें। ये स्वास्थ्य एवं पर्यावरण दोनों के लिए घातक हैं। सरकार ने भी इनके प्रयोग व फेंकने पर पाबंदी लगा रखी है।
4. घर का कूड़ा—करकट गली में न फेंके बल्कि निर्धारित स्थान पर डालें तथा गीला व सूखा कचरा अलग—अलग डालें। गीला कचरा खाद बनाने के काम आता है।
5. डिस्पोजेबल वस्तुओं यथा प्लेट, कप, गिलास आदि का प्रयोग न करें बल्कि पत्तों से बने पत्तल व दोनों (डोनों) का प्रयोग करें या कांच व धातु के बर्तन काम में लें।
6. दूध निकालने के लिए दुधारू पशुओं को ऑक्सीटोसीन का इंजैक्शन न लगायें। यह पशु व मानव दोनों के लिए नुकसानदेह होता है।
7. सब्जियों को जल्दी बड़ा करने के लिए भी ऑक्सीटोसीन का इंजैक्शन नहीं लगाना चाहिए। ऐसी सब्जी मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है।
8. रासायनिक खादों व कीटनाशकोंं का अंधाधुंध प्रयोग न करें।
9. बोतलबंद पानी व कोल्ड ड्रिंक का उपयोग न करें।
10. शराब न पीयें। इससे धन व स्वास्थ्य दोनों की बर्बादी होती है। साथ ही इसके निर्माण में भारी मात्रा में पानी खराब होता है।
11. नल को कभी खुला न छोड़े व पानी को व्यर्थ न बहने दें।
12. पेयजल नलकूपों व अन्य स्त्रोतों के पास गन्दा पानी जमा न होने दें।
13. सौन्दर्य प्रसाधनों जैसे शौम्पू, क्रीम, सेंट, लिपस्टिक, नेल पॉलिश आदि का प्रयोग न करें। इनसे प्राकृतिक सुन्दरता तो नष्ट होती ही है, इनके निर्माण के दौरान क्लोरो—फ्लोरो कार्बन गैसें भी निकलती हैं जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाती हैं।
14. चमड़े व अन्य प्राणी अंगों से बनी वस्तुओं का प्रयोग न करें। ये वस्तुएं जंगली जानवरों के अवैध शिकार को बढ़ावा देती हैं।
15. रेडियो, सी.डी. प्लेयर, टी.वी., डी.जे. आदि धीमी आवाज़ पर ही बजायें। इनसे ध्वनि प्रदूषण फैलता है।
16. धार्मिक आयोजनों में लाऊड स्पीकरों का प्रयोग न करें, भगवान तो मन की बात ही सुन लेते हैं।
17. हरे पेड़ों को न स्वयं काटें और न ही दूसरों को काटने दें।
18. खराब बैट्री कबाड़ी को न बेचें बल्कि विक्रेता को ही लौटायें। कबाडी़ द्वारा इन्हें तोड़े जाने पर शीशा धातु वातावरण में फैल जाता है जो स्वास्थ्य के लिए घातक है।
19. प्रेशर हार्न का प्रयोग न करें, यह प्रतिबन्धित है।
20. घर, कार्यालय आदि में विघुत उपकरणों को बेवजह चलता न छोड़ें।

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