Friday, 6 November 2015

जैव विविधता (Biodiversity) - पर्यावरण

जीवधारियों की विभिन्न प्रजातियों तथा उनकी विभिन्नताओं को जैव विविधता कहा जाता है| अध्ययन की दृष्टि से जय विविधता को तीन स्तरों में बांटा जा सकता है- (क) आनुवांशिक विविधता (ख) प्रजातीय विविधता (ग) पारितंत्रिय विविधता| 
हमारा देश भौगोलिक परिस्थितियों और जलवायु में विविधता के कारण एक जैव विविधता सम्पन्न देश| दुनिया के पांच प्रतिशत जीव भारत में पाए जाते हैं, जबकि भारत का कुल क्षेत्रफल संसार का केवल दो प्रतिशत ही है| दुनिया की कुल ज्ञात लगभग दो लाख 50 हजार वनस्पतियों में से भारत में लगभग 15 हजार वनस्पतियाँ पाई जाती हैं| भारत में पक्षियों की 1200 जातियां तथा  900 उपजातियां पाई जाती हैं| पशुओं की लगभग 8100 प्रजातियाँ और पेड़-पौधों की लगभग 47 हजार प्रजातियाँ भी हमारे देश में पाई जाती हैं| 
किन्तु जल प्रदूषण, अवैध शिकार, वन कटाव, मानव प्राणी संघर्ष, अनियोजित विकास तथा बढती आबादी के लिए भोजन और आवास की व्यवस्था के कारण जैव विविधता का तेजी से ह्रास हो रहा है|  देश में 133 जीव प्रजातियाँ 1972 के प्राणी सुरक्षा अधिनियम के तहत सुर्लभ घोषित की जा चुकी हैं तो दर्जनों अब तक विलुप्त हो चुकी हैं या विलुप्ति के कगार पर हैं| दुर्लभ घोषित प्रजातियों में 70 स्तनपायी, 22 सरीसृप, 3 उभयचर और 41 पक्षी प्रजातियाँ शामिल हैं| ये ऐसी प्रजातियाँ हैं जो अब क्षेत्र विशेष तक सिमित हो गई हैं| 
जैव विविधता के संरक्षण के लिए आवश्यक है कि शिकार पर प्रतिबन्ध को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, सुरक्षित वन क्षेत्र विक्सित किया जाए, वनों का विनाश और अवैध खनन रोका जाए तथा संकटग्रस्त प्रजातियों का संग्रहण किया जाए| इस दिशा में कुछ प्रयास हुए भी हैं | सरकार ने वन्य जीव संरक्षण क्षेत्र और राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना की है| टाइगर प्रोजेक्ट, पक्षी विहार, हाथी परियोजनाएं, काला हिरण प्रजनन केंद्र, गिद्ध प्रजनन केंद्र और अभ्यारण्य स्थापित करने के अलावा जैव संरक्षित क्षेत्र भी बनाए हैं| प्रमुख जैव संरक्षण क्षेत्रों में निकोबार, नामदाफा, मानस, काजीरंगा, सिमलीपाल, नंदादेवी, उत्तराखंड, नीलगिरी, कच्छ का रन, मन्नार की खाड़ी, कान्हा, नोकटेक, सुंदरवन और थार का रेगिस्तान शामिल हैं| देश में 68 राष्ट्रीय उद्यान, 367 अभ्यारण्य, 25 टाइगर प्रोजेक्ट और 11 हाथी परियोजनाओं के अलावा भी कई परियोजनाएं चल रही हैं|
लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए 12 नवम्बर बर्ड मैन ऑफ़ इंडिया डॉ.सलीम अली के जन्मदिन को राष्ट्रीय पक्षी दिवस के रूप में मनाया जाता है| 5 अक्टूबर को विश्व प्राणी दिवस और एक से आठ अक्टूबर तक वन्य प्राणी सुरक्षा सप्ताह मनाया जाता है| केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने-अपने राजकीय पशु, पक्षी, फूल और वृक्ष भी घोषित किये हुए हैं| हरियाणा में तो सभी सरकारी पर्यटन रेस्तरां और होटलों के नाम भी पक्षियों के नाम पर रखे गए हैं|  जैव विविधता के संरक्षण के लिए भारत सरकार ने 1952 में वन्य जीव बोर्ड का गठन किया और सन 1972 में वन्य प्राणी सुरक्षा अधिनियम बनाकर इसकी धारा एक में दुर्लभ प्रजातियों की सूची प्रकाशित की| 
किन्तु इतना सब करने के बाद भी जैव विविधता का ह्रास जारी है| कहीं बढती आबादी को साधन और सुविधाएं देने के नाम पर विकास परियोजनाओं की आड़ में सरकारी तंत्र कहर बरपा रहा है तो कहीं मानव का लालच और धन की भूख तबाही का कारन बन रही है|
अगर हमें अपनी समृद्ध विरासत को बचाना है तो ईमानदार और सामूहिक प्रयास करने होंगे| 

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