Saturday, 19 March 2016

बिजली की बचत पर्यावरण की रक्षा

"बिजली की बचत ही बिजली की बढ़त है|" आपने अक्सर सुना होगा| इसका अभिप्राय है यदि हम कम बिजली  की खपत करते हैं तो जो बिजली बचती है, वह हमारे बाद में काम आ जाती है| यानी कि बिजली बचाकर हम न सिर्फ उसकी मात्रा बढ़ाते हैं, बल्कि कम बिल अदा करके अपना पैसा भी बचाते हैं| 
बिजली की बचत से हमें आर्थिक लाभ तो होता ही है] इससे हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित होता है| क्योंकि की बिजली पैदा करने के लिए थर्मल प्लांटों में कोयला जलाया जाता है, जिससे जहरीली गसें हमारे वातावरण को प्रदूषित करती हैं| इतना ही नहीं थर्मल प्लांटों से निकलने वाली फ्लाई ऐश भी पर्यावरण को प्रदूषित करती है साथ ही उसका भण्डारण भी अब गंभीर समस्या बनता जा रहा है| एक अनुमान के अनुसार लगभग 50 हजार एकड़ उपजाऊ भूमि फ्लाई ऐश के नीचे दबी हुई है| 
यदि हम बिजली की खपत बढ़ाते जायेंगे तो हमें अधिक कोयला जलाना होगा, परिणामस्वरूप अधिक गसें वायुमंडल में घुलेंगी और अधिक फ्लाई ऐश के ढेर लगेंगे| लेकिन यदि हम कम मात्रा में बिजली की खपत करके बिजली बचायेंगे तो कम गैस उत्सर्जन होगा और हमारा पर्यावरण शुद्ध रहेगा| 

बिजली की बचत के उपाय- 

बिजली की बचत के लिए हमें बहुत अधिक त्याग की जरुरत नहीं है, यदि हम अपनी आदतों में मामूली सा सुधार कर लें और छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें तो भी बिजली की काफी बचत कर सकते हैं| जैसे-
1. परम्परागत बल्बों की बजाय एल ई डी बल्ब या सी एफ एल टयुबों का प्रयोग करें| इससे भारी मात्रा में बिजली की बचत होगी|
2. आवश्यकता न होने पर लाइट, पंखे, कूलर, AC, टी वी आदि को बंद कर दें|
3. किसी भी उपकरण को अधिक देर तक स्टैंडबाई मोड में न रखें|
4. अच्छी कंपनी के और फाइव स्टार रेटिंग वाले उपकरण ही खरीदें, जो कम बिजली की खपत करते हैं|
5. नलकूपों की मोटर केवल तभी चलायें जब खेती को वास्तव में ही पानी देने की जरुरत हो| फ्लैट रेट पर मिलने वाली बिजली का दुरुपयोग न करें|
6. बिजली के उपकरणों को काम समाप्त होते ही बंद कर दें|

उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर हम भी बिजली की बचत और पर्यावरण की सुरक्षा कर सकते हैं| तो आज से ही इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनायें और पर्यावरणविद बनें| 

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